Class 8 Hindi - WEST-BENGAL

Haridwar

पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तकों में 'हरिद्वार' अध्याय भारत के एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह अध्याय छात्रों को हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति, गंगा नदी के महत्व, हर-की-पौड़ी और वहाँ के धार्मिक व सांस्कृतिक परिवेश से परिचित कराता है। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता का संदेश मिलता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भौगोलिक विवरण, सांस्कृतिक महत्व और स्थानीय विशेषताओं पर आधारित छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

हरिद्वार का अर्थ

हरिद्वार का शाब्दिक अर्थ 'भगवान (हरि) का द्वार' है। यह वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर मैदानी भागों में प्रवेश करती है।

हर-की-पौड़ी

यह हरिद्वार का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध घाट है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ भगवान विष्णु के चरणों के निशान हैं और यहीं पर अमृत की बूंदें गिरी थीं।

कुंभ मेला

हरिद्वार दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक 'कुंभ मेले' का आयोजन स्थल है, जो हर बारह साल में एक बार यहाँ आयोजित किया जाता है।

गंगा आरती

शाम के समय हर-की-पौड़ी पर होने वाली माँ गंगा की भव्य आरती इस शहर की मुख्य सांस्कृतिक विशेषता है, जिसमें हजारों दीप जलाए जाते हैं।

भौगोलिक स्थिति

हरिद्वार उत्तराखंड राज्य में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है और इसे चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

Important Formulas

तीर्थ स्थल: हरिद्वार (उत्तराखंड में स्थित)
मुख्य नदी: गंगा नदी
प्रसिद्ध घाट: हर-की-पौड़ी
प्रमुख आयोजन: कुंभ मेला (हर 12 वर्ष बाद)
सांस्कृतिक विशेषता: संध्याकालीन गंगा आरती

Board Exam Info

पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) की कक्षा 8 की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में हरिद्वार का धार्मिक महत्व, गंगा नदी की स्थिति और हर-की-पौड़ी के बारे में छोटे प्रश्न (MCQ और अति लघु उत्तरीय) तथा वर्णनात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना अधिक होती है।

Frequently Asked Questions

हरिद्वार को 'हरिद्वार' क्यों कहा जाता है?

इसे 'हरिद्वार' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह चार धाम यात्रा का मुख्य द्वार है और यहाँ से भगवान (हरि) के धाम के रास्ते शुरू होते हैं।

हर-की-पौड़ी का क्या महत्व है?

यह हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट है जहाँ भक्त गंगा स्नान करते हैं और यहाँ शाम को प्रसिद्ध गंगा आरती होती है।

कुंभ मेला हरिद्वार में कितने वर्षों के बाद आयोजित होता है?

हरिद्वार में महाकुंभ मेला प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित किया जाता है।

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