Class 8 Hindi - KERALA
Haridwar
कक्षा 8 केरल एससीईआरटी (Kerala SCERT) पाठ्यक्रम के अंतर्गत 'हरिद्वार' अध्याय भारत के एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करता है। इस पाठ के माध्यम से छात्र हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति, गंगा नदी के महत्व, हर की पौड़ी के इतिहास और वहाँ होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यह अध्याय विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और विविधता में एकता से परिचित कराता है। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर आधारित लघु उत्तरीय और निबंधात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
हरिद्वार का अर्थ
हरिद्वार का अर्थ 'हरि (भगवान विष्णु) का द्वार' है। इसे शिव भक्तों द्वारा 'हरद्वार' यानी 'हर (शिव) का द्वार' भी कहा जाता है।
हर की पौड़ी
यह हरिद्वार का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध घाट है, जहाँ राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की याद में इसका निर्माण करवाया था।
गंगा आरती
हरिद्वार में हर की पौड़ी पर संध्या के समय प्रज्वलित दीपों और मंत्रोच्चार के साथ माँ गंगा की जाने वाली भव्य आरती, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।
कुंभ मेला
हरिद्वार उन चार स्थानों में से एक है जहाँ हर बारह साल में एक बार विश्व प्रसिद्ध 'कुंभ मेले' का आयोजन किया जाता है।
चार धाम यात्रा का द्वार
हरिद्वार को उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) की यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है।
Important Formulas
Board Exam Info
केरल (SCERT) कक्षा 8 हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में हरिद्वार की विशेषता, हर की पौड़ी का महत्व और गंगा आरती से जुड़े लघु उत्तरीय प्रश्न तथा संदर्भ सहित व्याख्या वाले प्रश्न अधिक आते हैं।
Frequently Asked Questions
हरिद्वार का नाम हरिद्वार और हरद्वार क्यों पड़ा?
वैष्णव संप्रदाय के लोग इसे भगवान विष्णु का मार्ग मानते हुए 'हरिद्वार' कहते हैं, जबकि शैव संप्रदाय के लोग इसे शिव का मार्ग मानते हुए 'हरद्वार' कहते हैं।
हर की पौड़ी का निर्माण किसने करवाया था?
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, हर की पौड़ी का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की स्मृति में करवाया था।
हरिद्वार में कुंभ मेला कितने वर्षों के अंतराल पर लगता है?
हरिद्वार में महाकुंभ मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर किया जाता है।
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