Class 8 Hindi - GUJARAT
Haridwar
कक्षा 8 गुजरात बोर्ड (GSEB) के पाठ्यक्रम में शामिल 'हरिद्वार' नामक यह अध्याय एक अत्यंत सुंदर यात्रा वृत्तांत है। इस पाठ में उत्तराखंड के पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, गंगा नदी के तट पर होने वाली महाआरती, और वहाँ के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व का सजीव चित्रण किया गया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय छात्रों को भारतीय संस्कृति, पवित्र नदियों और महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों से परिचित कराने के साथ-साथ वर्णनात्मक लेखन और यात्रा संस्मरण को समझने में मदद करता है। इस पाठ से अक्सर संक्षिप्त प्रश्न और स्थान विशेष के महत्व से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
हरिद्वार का परिचय
हरिद्वार का अर्थ है 'हरि (भगवान विष्णु) का द्वार'। यह उत्तराखंड राज्य में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और पवित्र नगर है।
गंगा नदी का महत्व
हरिद्वार में गंगा नदी पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है। यहाँ गंगा स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलने की धार्मिक मान्यता है।
हर की पैड़ी
यह हरिद्वार का सबसे प्रसिद्ध और मुख्य घाट है, जहाँ राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की याद में इसका निर्माण करवाया था।
गंगा आरती
संध्या के समय हर की पैड़ी पर हज़ारों दीपों के साथ होने वाली माँ गंगा की आरती इस नगर का सबसे मनमोहक और आध्यात्मिक दृश्य होता है।
कुंभ मेला
हरिद्वार चार स्थानों में से एक है जहाँ हर बारह साल में एक बार प्रसिद्ध 'कुंभ मेले' का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 8 की परीक्षाओं में यह पाठ सामान्यतः 3 से 5 अंकों का भार रखता है। इस अध्याय से हरिद्वार के भौगोलिक महत्व, हर की पैड़ी की विशेषता और गंगा आरती के वर्णन से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न और रिक्त स्थान पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
हरिद्वार को 'हरिद्वार' क्यों कहा जाता है?
चूँकि यह नगर भगवान शिव (हर) और भगवान विष्णु (हरि) के धाम तक पहुँचने का मुख्य मार्ग या द्वार माना जाता है, इसलिए इसे हरिद्वार कहा जाता है।
हर की पैड़ी का क्या महत्व है?
यह वही पवित्र स्थान है जहाँ ब्रह्मकुंड स्थित है और मान्यता है कि यहाँ अमृत की कुछ बूँदें गिरी थीं, जिससे इस घाट का अत्यधिक धार्मिक महत्व है।
कुंभ मेला हरिद्वार में कितने वर्षों के बाद आयोजित होता है?
हरिद्वार में महाकुंभ मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष के बाद ग्रहों की विशेष स्थिति के अनुसार होता है।
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