Class 8 Hindi - BIHAR

Do Gauraiya

बिहार बोर्ड कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'किसलय' भाग 3 का पाठ 'दो गौरैया' शांतिप्रिय और प्रकृति-प्रेम की एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। यह पाठ प्रसिद्ध लेखक शान्तिप्रिय द्विवेदी द्वारा रचित है, जिसमें घर के भीतर घोंसला बनाकर रहने वाली छोटी सी चिड़िया (गौरैया) के माध्यम से मानव और जीव-जंतुओं के बीच के सह-अस्तित्व को दर्शाया गया है। आज के समय में मोबाइल टॉवर और शहरीकरण के कारण विलुप्त हो रही गौरैया प्रजाति के संरक्षण का संदेश इस पाठ का मुख्य उद्देश्य है। बिहार बोर्ड (BSEB) परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे कहानी का सार, लेखिका/लेखक का परिचय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

गौरैया का स्वभाव

गौरैया एक बहुत ही सीधी और घरेलू चिड़िया है जो मानव बस्तियों के आसपास रहना पसंद करती है।

मानव और जीव संबंध

यह पाठ इंसानों और पक्षियों के बीच के प्रेम, आत्मीयता और उनके साथ सह-अस्तित्व की भावना को उजागर करता है।

पर्यावरण और जीव संरक्षण

तेजी से बदलते पर्यावरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण गौरैया जैसी छोटी चिड़िया के जीवन पर आए संकट का वर्णन किया गया है।

लेखक परिचय (शान्तिप्रिय द्विवेदी)

इस पाठ के रचनाकार शान्तिप्रिय द्विवेदी जी हैं, जिनकी लेखन शैली प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं के बेहद करीब है।

घोंसला बनाने की कला

गौरैया द्वारा घर के रोशनदान, तिनकों और कोनों में तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाने की सहज प्रक्रिया का वर्णन।

Important Formulas

गौरैया संरक्षण संदेश: प्रकृति से प्रेम और जीवों पर दया
मानवीय संवेदना + पर्यावरण संतुलन = सुरक्षित भविष्य
लेखक: शान्तिप्रिय द्विवेदी (प्रकृतिवादी रचनाकार)

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) की कक्षा 8 की हिंदी परीक्षा में इस चैप्टर से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से पाठ का सारांश, लेखिका/लेखक का नाम, गौरैया के विलुप्त होने के कारण तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

पाठ 'दो गौरैया' के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार शान्तिप्रिय द्विवेदी जी हैं।

आज के समय में गौरैया पक्षी क्यों कम दिखाई दे रही है?

शहरीकरण, पेड़ों की कटाई, पक्के मकानों का निर्माण और मोबाइल टावरों से निकलने वाले हानिकारक विकिरण के कारण गौरैया कम दिखाई देती है।

इस पाठ से हमें क्या मुख्य प्रेरणा मिलती है?

यह पाठ हमें मूक पक्षियों के प्रति दया भाव रखने और पर्यावरण तथा जीव-जंतुओं की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

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