Class 7 Hindi - MP
Phool Aur Kaanta
कक्षा 7 की हिंदी पाठ्यपुस्तक का पाठ 'फूल और कांटा' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक कविता है। इस पाठ में कवि ने एक ही पौधे पर जन्म लेने वाले फूल और कांटे के जीवन का सुंदर चित्रण किया है और उनके माध्यम से मनुष्य के स्वभाव और आचरण पर प्रकाश डाला है। फूल सबको अपनी सुगंध और सुंदरता से आकर्षित करता है और सभी को प्रिय होता है, जबकि कांटा सबको चुभता है और दुःख देता है। यह पाठ छात्रों को सिखाता है कि व्यक्ति की पहचान उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्मों और व्यवहार से होती है। मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) की परीक्षाओं के लिए यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अक्सर अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न, काव्यांश की व्याख्या और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
समान उद्गम, भिन्न स्वभाव
फूल और कांटे दोनों का जन्म एक ही पौधे, एक ही डाली पर होता है और वे एक ही जैसी हवा, पानी और धूप पाते हैं, फिर भी उनके स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
फूल का परोपकारी स्वभाव
फूल अपनी सुंदरता और मीठी सुगंध से सबका मन मोह लेता है, तितلی को गोद में लेता है, भौंरों को रस पिलाता है और देवताओं के चरणों में अर्पित होता है।
कांटे का कठोर स्वभाव
कांटा सबकी उंगलियों को फाड़ देता है, सुंदर कपड़ों को छेद देता है और भंवरे के पर कतर देता है। वह अपने चुभने वाले स्वभाव के कारण सभी को कष्ट पहुँचाता है।
कर्मों का महत्व (व्यंग्य/संदेश)
कवि समझाते हैं कि बड़प्पन ऊंचे कुल में जन्म लेने से नहीं मिलता। यदि किसी व्यक्ति के कर्म बुरे हैं, तो ऊंचे कुल में जन्म लेने का कोई लाभ नहीं होता; इंसान अपने अच्छे कर्मों से ही महान बनता है।
Important Formulas
Board Exam Info
मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) की वार्षिक परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कविता का केंद्रीय भाव (सार), 'फूल' और 'कांटे' के चरित्र या स्वभाव में अंतर, और पाठ से मिलने वाली सीख पर आधारित लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
फूल और कांटे में मुख्य अंतर क्या है?
फूल सबको सुख, सुंदरता और सुगंध देता है तथा सबका प्रिय होता है, जबकि कांटा सबको चुभकर कष्ट देता है और किसी को पसंद नहीं आता।
इस कविता के कवि कौन हैं और यह हमें क्या संदेश देती है?
इस कविता के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी हैं। यह संदेश देती है कि मनुष्य अपने ऊंचे कुल से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों और व्यवहार से महान बनता है।
कांटा भौंरे और तितली के साथ कैसा व्यवहार करता है?
कांटा तितली के सुंदर पंखों को कतर देता है और भौंरे के शरीर में चुभकर उसे घायल कर देता है।
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