Class 7 Hindi - GUJARAT
Phool Aur Kaanta
कक्षा 7 गुजरात बोर्ड (GSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक का पाठ 'फूल और कांटा' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक कविता है। यह कविता हमें सिखाती है कि जन्म या कुल के आधार पर किसी का बड़प्पन तय नहीं होता, बल्कि व्यक्ति अपने अच्छे कर्मों और व्यवहार से महान बनता है। फूल और कांटा दोनों एक ही पौधे पर, एक ही जैसी परिस्थितियों में पलते-बढ़ते हैं, लेकिन उनके स्वभाव और गुणों में जमीन-आसमान का अंतर होता है। बोर्ड परीक्षा और सत्र परीक्षाओं की दृष्टि से यह पाठ छात्र-छात्राओं के नैतिक विकास और परीक्षा में भावार्थ तथा प्रश्न-उत्तर लिखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
समान परवरिश, भिन्न स्वभाव
फूल और कांटे दोनों को एक ही पौधा, एक जैसी हवा, पानी और धूप मिलती है, फिर भी दोनों की आदतें और प्रभाव बिल्कुल अलग होते हैं।
कांटे की प्रवृत्ति
कांटा सबकी उंगलियों को छेदता है, तितलियों के पर कतरता है और सुंदर वस्त्रों को फाड़ देता है, जो बुरे स्वभाव का प्रतीक है।
फूल की प्रवृत्ति
फूल सभी को अपनी खुशबू और सुंदरता से आनंदित करता है, भौंरों को गोद में लेता है और भगवान के चरणों में अर्पित होता है, जो अच्छे कर्मों का प्रतीक है।
अच्छे कुल का महत्व
यदि किसी व्यक्ति का कुल (वंश) ऊँचा हो लेकिन उसके कर्म बुरे हों, तो वह समाज में आदर नहीं पाता।
कर्म की श्रेष्ठता
व्यक्ति अपने ऊंचे कुल से नहीं, बल्कि अपने अच्छे और परोपकारी कर्मों से ही बड़ा बनता है।
Important Formulas
Board Exam Info
गुजरात बोर्ड (GSEB) की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें कविता की पंक्तियों का भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, और 'फूल और कांटे के स्वभाव में क्या अंतर है?' जैसे वैचारिक प्रश्न मुख्य रूप से शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
फूल और कांटे की परवरिश में क्या समानता है?
दोनों एक ही पौधे पर पलते हैं, उन्हें एक जैसी धूप, पानी और हवा मिलती है।
फूल को भगवान के चरणों में क्यों चढ़ाया जाता है?
क्योंकि फूल अपनी सुंदरता और सुगंध से सबको सुख देता है और उसके कर्म परोपकारी होते हैं।
इस कविता से हमें क्या मुख्य सीख मिलती है?
यह सीख मिलती है कि हमें अच्छे कर्म करने चाहिए क्योंकि ऊंचे कुल में जन्म लेने से कोई महान नहीं बनता, कर्म ही इंसान को महान बनाते हैं।
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