Class 6 Hindi - RAJASTHAN
Satriya Aur Bihoo Nrty
अध्याय 'सत्रिया और बिहू नृत्य' राजस्थान बोर्ड कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अध्याय में हम असम के दो प्रसिद्ध लोक और शास्त्रीय नृत्यों—सत्रिया और बिहू—के बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं। सत्रिया नृत्य जहाँ असम के वैष्णव सत्रों से जुड़ा एक शास्त्रीय नृत्य है, वहीं बिहू वहाँ का एक उल्लासपूर्ण लोक नृत्य है जो फसल कटाई के समय किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय भारतीय संस्कृति, नृत्यों की उत्पत्ति, और उनके ऐतिहासिक महत्व से संबंधित प्रश्नों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
सत्रिया नृत्य
यह असम का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है जिसकी शुरुआत 15वीं शताब्दी में महान संत श्रीमंत शंकरदेव ने वैष्णव धर्म के प्रचार के लिए की थी।
बिहू नृत्य
यह असम का एक अत्यंत लोकप्रिय लोक नृत्य है जो बोहाग बिहू (रंगाली बिहू) के अवसर पर वसंत ऋतु और फसल की कटाई की खुशी में किया जाता है।
सत्र
सत्र असम में स्थित धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थान हैं, जिन्हें श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित किया गया था और जहाँ सत्रिया नृत्य का अभ्यास किया जाता है।
बिहूवान (गमछा)
बिहू नृत्य के दौरान असमिया संस्कृति का प्रतीक 'गमछा' या 'बिहूवान' विशेष रूप से उपयोग किया जाता है, जो आदर और सम्मान का प्रतीक है।
Important Formulas
Board Exam Info
राजस्थान बोर्ड (RBSE) की परीक्षाओं में इस अध्याय से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें सत्रिया और बिहू नृत्य में अंतर, उनके उद्गम स्थल, और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े लघु उत्तरीय और वस्तुनिष्ठ प्रश्न अधिक आते हैं।
Frequently Asked Questions
सत्रिया नृत्य को वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा भारत के आधिकारिक शास्त्रीय नृत्यों की सूची में शामिल किया गया था।
बिहू असम का मुख्य त्योहार है जो साल में तीन बार (बोहाग बिहू, कति बिहू और माघ बिहू) मनाया जाता है, जिसमें बोहाग बिहू पर नृत्य मुख्य रूप से होता है।
सत्रिया नृत्य की शुरुआत असम के महान संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव ने 15वीं शताब्दी में की थी।
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