Class 6 Hindi - BIHAR

Pariksha

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 6 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'किसलय' का पाठ 'परीक्षा' मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी हमें सिखाती है किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण हमारे व्यावहारिक गुण, ईमानदारी, और कर्तव्यनिष्ठा हैं। सुजानगढ़ के दीवान महाशय सुजान सिंह अपनी वृद्धावस्था के कारण अपने पद के लिए एक योग्य और ईमानदार व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक अनोखी परीक्षा का आयोजन करते हैं, जिसमें सभी उम्मीदवार फेल हो जाते हैं सिवाय एक व्यक्ति के। यह पाठ विद्यार्थियों को अच्छे चरित्र और निष्ठा का पाठ पढ़ाता है और परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

कहानी का उद्देश्य

यह पाठ विद्यार्थियों को यह सिखाता है कि जीवन में केवल डिग्रियां या किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि ईमानदारी, दयालुता और परोपकार जैसे मानवीय मूल्य सबसे बड़े गुण हैं।

सुजान सिंह का चरित्र

सुजान सिंह रियासत सुजानगढ़ के बूढ़े और अनुभवी दीवान थे, जो राज्य के लिए एक योग्य और कर्तव्यनिष्ठ उत्तराधिकारी की तलाश कर रहे थे।

अनोखी परीक्षा

दीवान जी ने उम्मीदवारों को परखने के लिए एक नाटक रचा जिसमें कीचड़ में फंसी हुई बैलगाड़ी को निकालने के बहाने उनकी मानवता की परीक्षा ली गई।

अनल सिंह (निराश उम्मीदवार)

अनल सिंह ने सभी उम्मीदवारों की स्वार्थी प्रवृत्ति के विपरीत एक गरीब किसान की मदद की, जिससे उनकी ईमानदारी और दयालुता सबके सामने आई और वे चुने गए।

प्रेमचंद की लेखन शैली

मुंशी प्रेमचंद की भाषा सरल, सहज और आम जनजीवन से जुड़ी हुई है जो पाठकों के दिल पर सीधा प्रभाव डालती है।

Important Formulas

सत्य और ईमानदारी ही सबसे बड़ी नीति है।
दूसरों की भलाई करना ही असली परीक्षा है।
किताबी ज्ञान से व्यावहारिक बुद्धि अधिक मूल्यवान है।

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 6 की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें पाठ का सारांश, चरित्र चित्रण (सुजान सिंह या अनल सिंह), और गद्यांश आधारित प्रश्न शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

पाठ 'परीक्षा' के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद हैं।

सुजान सिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा लेने के लिए क्या किया?

सुजान सिंह ने एक गरीब किसान का रूप धरकर कीचड़ में फंसी बैलगाड़ी का नाटक किया ताकि यह देख सकें कि कौन उम्मीदवार घमंड छोड़कर मदद करता है।

दीवान पद के लिए अंततः किसे चुना गया?

अनल सिंह को उनकी ईमानदारी और परोपकार की भावना के कारण दीवान पद के लिए चुना गया।

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