Class 5 Hindi - UP
Nyaay Ki Kursi
कक्षा 5 यूपी बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तक का यह पाठ 'न्याय की कुर्सी' सम्राट विक्रमादित्य के न्याय और उनके ऐतिहासिक सिंहासन की कहानी पर आधारित है। यह पाठ बच्चों को सिखाता है कि न्याय का पद बहुत ऊंचा होता है और उस पर बैठने वाले व्यक्ति को हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विद्यार्थियों के नैतिक मूल्यों की परख होती है और पाठ के सार, पात्रों के नाम तथा प्रश्न-उत्तर सीधे परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
सम्राट विक्रमादित्य का न्याय
सम्राट विक्रमादित्य अपने न्याय के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध थे। उनके मन में राजा और रंक का कोई भेद नहीं था।
न्याय की कुर्सी (सिंहासन)
राजा विक्रमादित्य का सिंहासन पत्थरों के बीच छिपा हुआ था, जिस पर बैठने वाले को स्वतः ही सही और गलत का ज्ञान हो जाता था।
चरवाहों का खेल
ग्वाले या चरवाहे जब उस टीले पर खेलते थे, तो एक बालक उस न्याय की कुर्सी पर बैठकर बिल्कुल निष्पक्ष न्याय करता था।
राजा भोज की जिज्ञासा
राजा भोज ने जब उस टीले को खुदवाया और उस सिंहासन को प्राप्त किया, तो वे भी उस पर बैठने का साहस करने लगे।
सच्चे न्याय का महत्व
पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों में सच्चाई, ईमानदारी और बिना किसी भेदभाव के न्याय करने की भावना जागृत करना है।
Important Formulas
Board Exam Info
यूपी बोर्ड की कक्षा 5 की परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य प्रश्नों में पाठ का सारांश, सम्राट विक्रमादित्य की विशेषताएं, और वाक्य प्रयोग या शब्दार्थ शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
न्याय की कुर्सी पर बैठने से क्या प्रभाव पड़ता था?
उस कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति के मन में स्वतः ही न्याय की भावना आ जाती थी और वह पूरी निष्पक्षता से फैसला सुनाता था।
राजा विक्रमादित्य किस बात के लिए प्रसिद्ध थे?
राजा विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और न्यायप्रियता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे।
इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा सच का साथ देना चाहिए और किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए।
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