Class 5 Hindi - RAJASTHAN
Chand Ka Kurta
कक्षा 5 राजस्थान बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तक का यह पाठ 'चांद का कुर्ता' एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध कविता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने आसमान में चमकने वाले चांद की बाल-सुलभ जिद और उसकी माता की ममता का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। चांद अपनी माँ से ठंड से बचने के लिए नाप-कर एक झिलमिलाता हुआ ऊनी कुर्ता सिलवाने की जिद करता है। यह पाठ बच्चों में कल्पनाशीलता को बढ़ाता है और बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें से पद्यांश की व्याख्या और भावार्थ से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
कविता का मुख्य भाव
यह कविता चांद और उसकी माँ के बीच के प्रेम और संवाद को दर्शाती है, जहाँ चांद ठंड से परेशान होकर अपने लिए एक नया कुर्ता माँगता है।
चांद की जिद
चांद अपनी माँ से कहता है कि वह रोज घटता-बढ़ता रहता है, इसलिए कोई भी एक माप का कुर्ता उसके शरीर पर ठीक नहीं बैठता।
मौसम और वस्त्र
इस पाठ में जाड़े (सर्दी) के मौसम का जिक्र है और ठंड से बचने के लिए गर्म ऊनी वस्त्रों की आवश्यकता को समझाया गया है।
बाल-कल्पना
बच्चों के मन में उठने वाले अनूठे और कोमल विचारों को इस कविता के माध्यम से बहुत ही सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है।
Important Formulas
Board Exam Info
राजस्थान बोर्ड (RBSE) की कक्षा 5 की परीक्षा में इस पाठ से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से कविता की पंक्तियों का सरल अर्थ, शब्द-अर्थ और चांद की समस्या से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
चांद अपनी माँ से क्या जिद कर रहा था?
चांद अपनी माँ से ठंड से बचने के लिए एक नाप का झिलमिलाता हुआ कुर्ता सिलवाने की जिद कर रहा था।
चांद के लिए एक माप का कुर्ता क्यों नहीं बन पा रहा था?
क्योंकि चांद रोज घटता और बढ़ता रहता है (उसका आकार बदलता रहता है), इसलिए कोई भी एक कुर्ता उसे फिट नहीं आता था।
इस कविता के कवि कौन हैं?
इस प्रसिद्ध कविता 'चांद का कुर्ता' के रचयिता श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' जी हैं।
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