Class 5 Hindi - PUNJAB
Nyaay Ki Kursi
कक्षा 5 पंजाब बोर्ड (PSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक का यह पाठ 'न्याय की कुर्सी' महान सम्राट विक्रमादित्य के न्याय और निष्पक्षता पर आधारित है। इस पाठ में बताया गया है कि राजा विक्रमादित्य अपनी न्यायप्रियता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे। उनके सिंहासन को 'न्याय की कुर्सी' कहा जाता था, जिस पर बैठकर कोई भी राजा या व्यक्ति अन्याय नहीं कर सकता था। यह पाठ विद्यार्थियों को ईमानदारी, सच्चाई और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। परीक्षा की दृष्टि से इस पाठ से शब्द-अर्थ, वाक्य बनाओ और प्रश्नोत्तर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
सम्राट विक्रमादित्य
विक्रमादित्य एक महान और न्यायप्रिय राजा थे जो अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे और हमेशा सही फैसला करते थे।
न्याय की कुर्सी (सिंहासन)
यह राजा विक्रमादित्य का वह जादुई सिंहासन था जिस पर बैठने वाले व्यक्ति में स्वतः न्याय करने की दिव्य शक्ति आ जाती थी।
निष्पक्षता
बिना किसी भेदभाव, ऊंच-नीच या रिश्तेदारी के केवल सच के आधार पर सही फैसला करना ही निष्पक्षता कहलाता है।
बुद्धिमत्ता
कठिन से कठिन समस्याओं को सूझबूझ और समझदारी से सुलझाने की क्षमता को बुद्धिमत्ता कहते हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
पंजाब (PSEB) बोर्ड की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पाठ के सार, कठिन शब्दों के अर्थ, वाक्य निर्माण और 'राजा विक्रमादित्य न्याय क्यों करते थे?' जैसे लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
सम्राट विक्रमादित्य क्यों प्रसिद्ध थे?
सम्राट विक्रमादित्य अपनी बुद्धि, वीरता और न्यायप्रियता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे।
न्याय की कुर्सी की क्या विशेषता थी?
न्याय की कुर्सी की विशेषता यह थी कि उस पर बैठने वाला कभी भी अन्याय नहीं कर सकता था और हमेशा सच का साथ देता था।
हमें इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और जीवन में निष्पक्ष व न्यायप्रिय बनना चाहिए।
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