Class 12 Hindi - UP
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा 12 हिंदी (UPMSP) के गद्य खंड का यह अध्याय 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डा. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी अनुवाद का एक अंश है। इस पाठ में लेखक ने आधुनिक समाज में श्रम-विभाजन के नाम पर फैली जाति-प्रथा की विसंगतियों और अमानवीयता पर कड़ा प्रहार किया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जीवन मूल्य, सामाजिक न्याय, लेखक के विचार और गद्यांश पर आधारित प्रश्न परीक्षा में निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक बताते हैं कि जाति-प्रथा मनुष्य का श्रम-विभाजन स्वाभाविक रूप से नहीं करती, बल्कि यह सभ्य समाज में श्रम-विभाजन का एक अस्वाभाविक रूप है जो श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन कर देती है।
जाति-प्रथा दोषपूर्ण व्यवस्था क्यों है?
यह प्रथा मनुष्य की रुचि या क्षमता का विचार किए बिना जन्म के आधार पर उसका पेशा निर्धारित करती है, जिससे जीवनभर के लिए व्यक्ति उस पेशे में बंध जाता है, चाहे वह उसमें रुचि रखे या नहीं।
गतिशीलता और परिवर्तन का अभाव
हिन्दू समाज की जाति-प्रथा ऐसी है जो मनुष्यों को पेशा बदलने की अनुमति नहीं देती। आधुनिक दुनिया में उद्योग-धंधों की प्रक्रिया व तकनीक में तेजी से बदलाव होता है, इसलिए पेशा बदलने की स्वतंत्रता न होना भुखमरी का कारण बनता है।
लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप
डॉ. अंबेडकर के अनुसार लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के मिले-जुले अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है जहाँ समाज में ‘दूध-पानी’ के मिश्रण की तरह भाईचारा होना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की कक्षा 12 हिंदी परीक्षा में गद्य खंड से सामान्यतः 10 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। इस पाठ से गद्यांश पर आधारित प्रश्न (रेखांकित अंश की व्याख्या और उससे जुड़े प्रश्न) तथा लेखक का साहित्यिक परिचय एवं जीवन परिचय आने की संभावना सबसे अधिक होती है।
Frequently Asked Questions
इस पाठ के लेखक बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं और यह उनके प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के हिंदी अनुवाद 'जाति-भेद का उच्छेद' से लिया गया है।
इस पाठ के लेखक बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं और यह उनके प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के हिंदी अनुवाद से लिया गया है।
लेखक ने जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का अस्वाभाविक रूप क्यों कहा है?
क्योंकि जाति-प्रथा मनुष्य की व्यक्तिगत रुचि, क्षमता और योग्यता का विचार किए बिना जन्म के आधार पर उसका पेशा तय करती है, जो कि अस्वाभाविक है।
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
इस पाठ से मुख्य रूप से गद्यांश आधारित प्रश्न (जैसे रेखांकित अंश की व्याख्या और पाठ-लेखक का नाम) तथा वैचारिक लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
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