Class 12 Hindi - MAHARASHTRA
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा १२ महाराष्ट्र बोर्ड (MSBSHSE) के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' प्रसिद्ध विचारक और संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रतिष्ठित भाषण 'ऐनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट' का हिंदी रूपांतरण है। इस पाठ में लेखक ने आधुनिक समाज में श्रम-विभाजन के नाम पर फैली जाति-प्रथा की विसंगतियों और अमानवीयता पर कड़ा प्रहार किया है। यह अध्याय छात्रों को यह समझाता है कि जाति-प्रथा कोई श्रम का विभाजन नहीं है, बल्कि यह श्रमिकों का विभाजन है जो मनुष्य की स्वतंत्रता और गतिशीलता को बाधित करती है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह वैचारिक निबंध छात्रों के विश्लेषणात्मक कौशल और सामाजिक समझ को परखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक के अनुसार श्रम-विभाजन स्वाभाविक है क्योंकि यह किसी भी सभ्य समाज की आवश्यकता है, लेकिन जाति-प्रथा मनुष्य की रुचि या क्षमता पर आधारित न होकर माता-पिता के सामाजिक स्तर पर पहले से ही तय कर दी जाती है, जो पूरी तरह अस्वाभाविक है।
श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन
जाति-प्रथा केवल श्रम का विभाजन नहीं करती, बल्कि यह विभाजित विभिन्न जातियों को ऊँच-नीच के पायदान में बाँट देती है, जिससे समाज में असमानता और भेदभाव की दीवारें खड़ी हो जाती हैं।
अरुचिकर कार्य और दुष्चक्र
चूँकि जाति-प्रथा मनुष्य को जीवनभर के लिए एक ही पेशे में बांध देती है, भले ही उसमें उसकी रुचि हो या न हो, इसलिए व्यक्ति भूखों मरने की स्थिति आने पर भी विवशतापूर्वक वही कार्य करने के लिए मजबूर होता है।
आदर्श समाज की रूपरेखा
डॉ. आंबेडकर के अनुसार एक आदर्श समाज वह है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (भ्रातृभाव) पर आधारित हो, जहाँ समाज के बहुमुखी हितों में सबका भाग हो और सबको समाज के संचारित साधनों का पूरा अवसर मिले।
गतिशीलता और परिवर्तन का अभाव
जात-पाँत के बंधनों के कारण भारत में आपातकालीन स्थिति में भी पेशा बदलने की अनुमति नहीं मिलती, जिससे लोगों में क्षुब्धता और अकुशलता उत्पन्न होती है और बेरोजगारी बढ़ती है।
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Board Exam Info
महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MSBSHSE) की कक्षा १२ की हिंदी परीक्षा में यह गद्य पाठ लगभग ६ से ८ अंकों का भारांश (weightage) रखता है। इस चैप्टर से पठित गद्यांश, संदर्भ सहित व्याख्या (व्याख्यात्मक प्रश्न), दीर्घ उत्तरीय वैचारिक प्रश्न और लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
लेखक डॉ. आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा श्रम-विभाजन का ही एक रूप क्यों नहीं मानी जा सकती?
क्योंकि श्रम-विभाजन किसी भी सभ्य समाज की आवश्यकता है और यह मनुष्य की रुचि पर आधारित होता है, जबकि जाति-प्रथा मनुष्य की इच्छा या क्षमता के बिना जन्म के आधार पर थोपी जाती है।
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य जाति-प्रथा की बुराइयों को उजागर करना और स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व पर आधारित एक समतावादी आदर्श समाज की स्थापना करना है।
बोर्ड परीक्षा के लिए इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?
बोर्ड परीक्षा में आमतौर पर गद्यांश आधारित बोध प्रश्न, जाति-प्रथा के दुष्परिणामों पर वैचारिक प्रश्न और डॉ. आंबेडकर की दृष्टि से आदर्श समाज की विशेषताओं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
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