Class 12 Hindi - GUJARAT
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा 12 गुजरात बोर्ड (GSEB) के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट' का हिंदी रूपांतरण है। इस पाठ में लेखक ने भारतीय समाज में व्याप्त जाति-प्रथा और उसके आधार पर होने वाले श्रम-विभाजन की विसंगतियों पर करारा प्रहार किया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छात्रों में सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों की समझ विकसित करता है। इस अध्याय से वैचारिक और तथ्यात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद करते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक के अनुसार, जाति-प्रथा केवल श्रम-विभाजन नहीं है, बल्कि यह सभ्य समाज में श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन भी है जो मनुष्य की रुचि की उपेक्षा करता है।
लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप
लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, यह मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के मिले-जुले अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
जाति-प्रथा के दुष्परिणाम
जाति-प्रथा मनुष्य को जीवनभर के लिए एक ही पेशे में बांध देती है, जिससे भुखमरी, बेरोजगारी और कार्यकुशलता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
समानता और स्वतंत्रता का आदर्श
एक आदर्श समाज में स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व (भाईचारा) का भाव होना चाहिए, जिसे लेखक ने दूध और पानी के मिश्रण की तरह बताया है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार
अंबेडकर जी मानते हैं कि पैतृक पेशे में बदलाव की अनुमति न होने के कारण व्यक्ति संकट में पड़ जाता है और उसकी मानसिक क्षमता कुंद हो जाती है।
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Board Exam Info
गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 12 की हिंदी परीक्षा में यह पाठ लगभग 4 से 6 अंकों का भारांक रखता है। इस चैप्टर से बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), एक-दो वाक्यों वाले अति लघु उत्तरीय प्रश्न, और गद्यांश आधारित समझ (comprehension) या निबंधात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ के लेखक डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं और यह उनके प्रसिद्ध अंग्रेजी भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट' (जाति भेद का उच्छेद) का हिंदी अनुवाद है, जिसे ललई सिंह यादव ने 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' नाम से रूपांतरित किया है।
इस पाठ के लेखक डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं। यह उनका प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट' (जाति भेद का उच्छेद) का हिंदी रूपांतरण है।
लेखक ने जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का ही रूप क्यों नहीं माना है?
लेखक का मानना है कि श्रम-विभाजन किसी भी सभ्य समाज की आवश्यकता है, लेकिन जाति-प्रथा मनुष्य की व्यक्तिगत रुचि या क्षमता पर आधारित न होकर माता-पिता के सामाजिक स्तर पर पहले से ही तय कर दी जाती है, जो अस्वाभाविक है।
बोर्ड परीक्षा के लिए इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
बोर्ड परीक्षा में मुख्य रूप से अंबेडकर जी के तर्कों, जाति-प्रथा के दुष्प्रभावों, और लोकतंत्र की परिभाषा से संबंधित दीर्घ उत्तरीय एवं बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
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