Class 11 Hindi - WEST-BENGAL
Poetry: Ghar Ki Yaad
गिर्जरी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता 'घर की याद' पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक में एक अत्यंत मार्मिक कविता है। यह कविता कवि को जेल की कालकोठरी में सावन के महीने में अपने घर और परिवार की याद दिलाती है। इसमें घर के प्रत्येक सदस्य – माता, पिता, भाई और बहन – के प्रति कवि के अगाध प्रेम और उनकी विशेषताओं का सजीव चित्रण किया गया है। परीक्षा की दृष्टि से यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें से भाव-सौंदर्य, काव्यांश की व्याख्या और प्रतीकों पर आधारित प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
सावन मास और घर की याद
सावन के निरंतर बरसते पानी के बीच कवि को अपने घर और परिवार की ऐसी याद आती है कि उनका मन व्यथित हो उठता है।
पिता का व्यक्तित्व
कवि के पिता बुढ़ापे में भी युवाओं की तरह ऊर्जावान, साहसी, गीता का पाठ करने वाले और खुले दिल के इंसान हैं, जो जेल में बंद अपने पांचवें बेटे (भवानी प्रसाद मिश्र) को लेकर चिंतित हैं।
माता का स्नेह
कवि की माता अनपढ़ी हैं, लेकिन उनका हृदय प्रेम और वात्सल्य का अथाह सागर है जो अपने सभी बच्चों को समान रूप से स्नेह करती हैं।
भाई-बहनों का चित्रण
कवि ने अपने भाइयों को बड़े भुजा के समान बलवान और बहनों को स्नेहमयी बताया है, जो मायके आने पर भाई (कवि) को न पाकर दुखी होंगी।
पांचवां बेटा
कवि खुद को अपने माता-पिता का 'अभागा' और पांचवां बेटा मानता है जो देश की स्वतंत्रता के लिए जेल की सजा काट रहा है।
Important Formulas
Board Exam Info
पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा संसद (WBBSE) की कक्षा 11 की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें सप्रसंग व्याख्या, कविता के केंद्रीय भाव और पात्रों (विशेषकर पिता) के चरित्र-चित्रण से संबंधित दीर्घ उत्तरीय एवं लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
कवि भवानी प्रसाद मिश्र को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में रहना पड़ा और सावन की झड़ी के समय उन्हें अपने माता-पिता और भाई-बहनों की बहुत याद आती है।
सावन की रिमझिम फुहारों के बीच कवि को एकांतवास में अपने परिवार की आत्मीयता और प्रेम की कमी खलती है, जिससे उन्हें घर की याद सताती है।
कविता में पिता की क्या विशेषताएं बताई गई हैं?
कवि के पिता बुढ़ापे में भी चुस्त-दुरुस्त, साहसी, दौड़ने-तैरने में आगे और ईश्वर भक्त हैं, जो कठिनाइयों में भी घबराते नहीं हैं।
पांचवां बेटा किसे कहा गया है और उसे अभागा क्यों कहा गया है?
पांचवां बेटा स्वयं कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं। उन्हें अभागा इसलिए कहा गया है क्योंकि वे अपने परिवार से दूर जेल में हैं और उनके होने से घर का सुख अधूरा है।
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