Class 11 Hindi - UP

Prose: Miyan Nasirudeen

कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1) का यह पाठ 'मियाँ नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती द्वारा रचित एक प्रसिद्ध शब्द-चित्र है। इसमें मियाँ नसीरुद्दीन के माध्यम से मसीहाई अंदाज में रोटी पकाने की कला और उनके खानदानी पेशे के प्रति समर्पण को दर्शाया गया है। लेखक ने उनके जीवन के अनुभवों और बातचीत के जरिए कारीगरी की कला, पुराने समय के शाही बावरचियों की शान और बदलते दौर की विडंबनाओं का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। यूपी बोर्ड (UPMSP) परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ चरित्र चित्रण और वैचारिक प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Start Learning Free

Key Concepts

शब्द-चित्र (Word Picture)

यह एक ऐसी साहित्यिक विधा है जिसमें लेखक शब्दों के माध्यम से किसी व्यक्ति, स्थान या घटना का ऐसा जीवंत वर्णन करता है कि पाठक के सामने उसका चित्र उभर जाता है।

मियाँ नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व

वे 'नॉन-बाईयों के मसीहा' हैं जो अपने खानदानी पेशे पर गर्व करते हैं और काम के प्रति गहरी निष्ठा व हुनर का सम्मान रखते हैं।

शाही अंदाज

मियाँ नसीरुद्दीन की बातचीत का ढंग और उनका आत्मविश्वास पुराने समय के शाही बावरचियों की शान-शौकत और उनके बड़प्पन को दर्शाता है।

खानदानी हुनर

पाठ में यह संदेश दिया गया है कि कोई भी काम सीखने के लिए अभ्यास और तालीम की जरूरत होती है, जैसे 'हुनर अल्लाह देन है और तालीम वालिद की ही है'।

Important Formulas

मियाँ नसीरुद्दीन छपे-छपाए रोटियों के किस्म बनाने के लिए मशहूर थे (जैसे- बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान आदि)।
उनका खानदानी पेशा गढ़ैया मोहल्ले के गढ़इयाँ मुहल्ले की मटिया महल इलाके से जुड़ा था।

Board Exam Info

उत्तर प्रदेश (UPMSP) कक्षा 11 हिंदी परीक्षा में इस पाठ से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से मियाँ नसीरुद्दीन का चरित्र-चित्रण, पाठ के मुख्य संदेश, और उनके वाक्यों या बयानों के आशय स्पष्ट करने वाले प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

मियाँ नसीरुद्दीन को 'नॉन-बाईयों का मसीहा' क्यों कहा गया है?

क्योंकि वे विभिन्न प्रकार की रोटियां बनाने की कला में माहिर हैं और अपने पुश्तैनी पेशे के मसीहा यानी रक्षक व उस्ताद माने जाते हैं।

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान पर क्यों गई थीं?

लेखिका उनसे इंटरव्यू लेने और उनके खानदानी हुनर तथा रोटियां पकाने की कला के बारे में जानकारी प्राप्त करने गई थीं।

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य शारीरिक श्रम और पारंपरिक हुनर का सम्मान करना तथा लुप्त हो रही कारीगर संस्कृति को उजागर करना है।

Learn Prose: Miyan Nasirudeen with Your AI Tutor

10 different ways to study this chapter. Free for 3 chapters per day.

Lecture

Key Points

Interactive

Quiz

Flashcards

Start Learning Free

More Hindi Chapters - UP Class 11