Class 11 Hindi - RAJASTHAN

Prose: Miyan Nasirudeen

प्रस्तुत पाठ 'मियां नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती द्वारा रचित एक प्रसिद्ध शब्द-चित्र है, जो 'हम सफरनामा' संग्रह से लिया गया है। यह पाठ मसीहाई अंदाज़ में रोटी पकाने के मजे हुए कारीगर मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व, उनके खानदानी पेशे और उनके गहरे अनुभवों का जीवंत वर्णन करता है। इसमें मियाँ नसीरुद्दीन के बात करने के अंदाज, उनके तेवर और नानबाइयों के मसीहा कहे जाने के गर्व को बहुत ही रोचक ढंग से उभारा गया है। राजस्थान बोर्ड (RBSE) परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ चरित्र-चित्रण और लेखिका की शैली को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

मियाँ नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व

वे छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने वाले नानबाइयों के मसीहा हैं, जो अपने खानदानी पेशे पर बहुत गर्व करते हैं और बदलाव के दौर में भी अपने पुश्तैनी हुनर को सहेज कर रखे हुए हैं।

लेखिका की मुलाकात

लेखिका कृष्णा सोबती की मियाँ नसीरुद्दीन से जामा मस्जिद के पास मटिया महल के गढ़ैया मोहल्ले में एक अंधेरी व सामान्य दुकान पर साक्षात्कार के रूप में मुलाकात होती है।

खानदानी हुनर और तालीम

मियाँ साहब का मानना है कि हुनर सीखने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, जैसे तालीम की शुरुआत मकतब से होती है, वैसे ही हुनर की तालीम उस्ताद के हथकंडे सीखने से मिलती है।

बदलाव के प्रति उपेक्षा

मियाँ नसीरुद्दीन आज के कामचोर कारीगरों और नई पीढ़ी के काम सीखने के प्रति उदासीन रवैये से बहुत आहत हैं, वे पारंपरिक मेहनत और लगन को ही असली तालीम मानते हैं।

शब्द-चित्र शैली

यह पाठ संस्मरण और रेखाचित्र का मिला-जुला रूप है, जिसमें पात्रों के हाव-भाव और बोलचाल के ढंग से उनका जीवंत चरित्र उभर कर सामने आता है।

Important Formulas

नानबाई: विभिन्न प्रकार की रोटियाँ और नान बनाने वाला कारीगर।
मटिया महल: पुरानी दिल्ली का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पारंपरिक मोहल्ला।
अखबारनवीसों: पत्रकार या रिपोर्टर, जिनसे मियाँ नसीरुद्दीन बचना पसंद करते थे।
बड़चलन: बुजुर्गों या पुश्तैनी शान और परंपरा का बखान करने का अंदाज।

Board Exam Info

राजस्थान बोर्ड (RBSE) कक्षा 11 हिंदी अनिवार्य पाठ्यक्रम में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षाओं में मियाँ नसीरुद्दीन का चरित्र-चित्रण, लेखिका और मियाँ के बीच की बातचीत के उद्देश्य, तथा पाठ के व्यंग्यात्मक पहलुओं पर आधारित लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रमुखता से आते हैं।

Frequently Asked Questions

मियाँ नसीरुद्दीन को 'नानबाइयों का मसीहा' क्यों कहा गया है?

क्योंकि वे न केवल छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने में माहिर थे, बल्कि वे अपने खानदानी पेशे के सबसे पुराने और अनुभवी उस्ताद थे जो इस हुनर की असल शान को जानते थे।

लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन से अचानक क्या पूछ लिया जिससे वे नाराज हो गए?

लेखिका ने उनके कारीगरों या شاگردों (चेलों) के बारे में पूछ लिया था, जिससे मियाँ साहब को लगा कि लेखिका उनके काम पर सवाल उठा रही है।

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पेशों के हुनरमंद लोगों के जीवन संघर्ष, उनके स्वाभिमान और पीढ़ी दर पीढ़ी लुप्त हो रही कला के प्रति समाज का ध्यान आकर्षित करना है।

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