Class 11 Hindi - MP
Poetry: Ghar Ki Yaad
कक्षा 11वीं मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) की पाठ्यपुस्तक 'आरोह भाग 1' में संकलित कविता 'घर की याद' के रचयिता महान गांधीवादी कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं। यह कविता उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल की एकांत कालकोठरी में लिखी थी। सावन के महीने में झमाझम बारिश को देखकर कवि को अपने घर, माता-पिता और भाई-बहनों की बहुत याद आती है। कविता में घर के ममत्व, आत्मीयता और पारिवारिक रिश्तों की अटूट मिठास का अत्यंत मार्मिक और सजीव चित्रण किया गया है। परीक्षा की दृष्टि से यह कविता केंद्रीय भाव, सहसंवेदना और काव्यांश की व्याख्या के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
जेल की एकांत वास और होमसिकनेस
कवि भवानी प्रसाद मिश्र स्वतंत्रता आंदोलन के सिलसिले में जेल में बंद हैं। सावन की रिमझिम फुहारें उनके मन में अपने घर और परिवार के प्रति गहरे संस्मरण और वियोग की पीड़ा जगा देती हैं।
माता का प्रेम और वात्सल्य
कवि की मां अनपढ़ हैं, किंतु उनकी ममता अगाध है। वे अपने पांचवें बेटे (भवानी प्रसाद मिश्र) को लेकर सबसे अधिक दुखी रहती हैं, क्योंकि वह जेल में है और सावन के दिन कट रहे हैं।
पिता का व्यक्तित्व
कवि के पिता बुजुर्ग होने के बावजूद शारीरिक रूप से बेहद फुर्तीले, साहसी, और गीता प्रेमी हैं। वे रोज दंड बैठक लगाते हैं और मौत को भी सामने देखकर घबराते नहीं हैं।
सावन मास की भूमिका
सावन का महीना प्रेम और उमंग का प्रतीक है, जो वर्षा के माध्यम से कवि के अंतर्मन में प्रियजनों की यादों को तीव्र कर देता है। प्रकृति का यह उल्लास कैदी कवि के लिए दुख का कारण बन जाता है।
सहोदर भाइयों और बहनों का चित्रण
कवि के भाई भुजाओं के बल पर खड़े होने वाले साहसी और बहनें प्रेम से भरी हुई हैं। वे अपने भाई को याद करके दुखी हैं और मायके आने पर कवि की कमी खलती है।
Important Formulas
Board Exam Info
मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) की परीक्षाओं में इस अध्याय से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कविता का केंद्रीय भाव, 'पाँचवें बेटे' के माध्यम से कवि की मनोदशा का वर्णन और सावन मास के प्रभाव से जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता में 'पाँचवाँ बेटा' कवि भवानी प्रसाद मिश्र स्वयं को कहते हैं। वह जेल में बंद हैं और सावन के महीने में घर की याद आने के कारण उदास हैं।
कवि के पिता बुढ़ापे में भी अत्यंत फुर्तिले, साहसी, धाकड़, नियम से व्यायाम करने वाले और ईश्वर के प्रति गहरी आस्था रखने वाले (गीता प्रेमी) व्यक्ति हैं।
यह कविता भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा जेल में बिताए गए दिनों की पृष्ठभूमि में रची गई थी।
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