Class 10 Hindi - KERALA
Prose: Naubatkhane Mein Ibadat
प्रस्तुत अध्याय 'नौबतखाने में इबादत' यतीन्द्र मिश्र द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध व्यक्तिचित्र है। इसमें प्रसिद्ध शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, उनके संगीत के प्रति समर्पण, काशी की सांस्कृतिक विरासत और रियाज के प्रति उनकी निष्ठा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। यह पाठ विद्यार्थियों को सिखाता है कि संगीत साधना, एकाग्रता और अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम कितना आवश्यक है। केरल (SCERT) बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह पाठ जीवन मूल्यों और चरित्र चित्रण के प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे विद्यार्थियों को अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।
Start Learning FreeKey Concepts
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जीवन परिचय
बिस्मिल्ला खाँ का जन्म बिहार के डुमरांव में हुआ था और उनका मूल नाम कमरुद्दीन था। वे शहनाई को संगीत की मुख्यधारा में लाने और उसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महान वादक थे।
काशी और बालाजी का मंदिर
काशी को संगीत और संस्कृति की नगरी माना जाता है। बिस्मिल्ला खाँ का शहनाई वादन से गहरा संबंध काशी के संकटमोचन मंदिर और बालाजी के मंदिर के नौबतखाने से जुड़ा हुआ था।
सुप्रसिद्ध शहनाई वादक और रियाज
बिस्मिल्ला खाँ प्रतिदिन घंटों रियाज करते थे। उनका मानना था कि संगीत में सुरों की तासीर तभी आती है जब सच्चे मन और अनुशासन के साथ अभ्यास किया जाए।
पाठ का शीर्षक 'नौबतखाने में इबादत'
इसका अर्थ है कि संगीत का अभ्यास करना या बजाना ही ईश्वर की सच्ची इबादत (प्रार्थना) है। नौबतखाना वह स्थान होता है जहाँ बैठकर मंगलध्वनि बजाई जाती है।
भारतीय संस्कृति और हिंदू-मुहम्मद एकता
बिस्मिल्ला खाँ सच्चे अर्थों में भारतीय संस्कृति की गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक थे, जो अपने धर्म के साथ-साथ काशी के मंदिरों और परंपराओं का भी उतना ही सम्मान करते थे।
Important Formulas
Board Exam Info
केरल (SCERT) कक्षा 10 हिंदी बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में पाठ के सारांश, बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ, काशी की सांस्कृतिक महत्ता और 'नौबतखाने में इबादत' शीर्षक की सार्थकता से संबंधित दीर्घ उत्तरीय तथा लघु उत्तरीय प्रश्न अधिक आते हैं।
Frequently Asked Questions
पाठ का नाम 'नौबतखाने में इबादत' क्यों रखा गया है?
क्योंकि उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत साधना और शहनाई बजाना ही ईश्वर की इबादत (प्रार्थना) के समान था, और वे नौबतखाने में बैठकर ही संगीत साधना करते थे।
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था?
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम कमरुद्दीन था।
बिस्मिल्ला खाँ को कौन सा सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ था?
उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्राप्त हुआ था।
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