Class 10 Hindi - HARYANA
Prose: Netaji ka Chashma
कक्षा 10 हरियाणा बोर्ड (BSEH) की पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग 2 का पाठ 'नेताजी का चश्मा' स्वयं प्रकाश जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कहानी है। यह कहानी हमें देशभक्ति की सच्ची परिभाषा समझाती है। इसमें हालदार साहब, कस्बे के पानवाले और एक चश्मेवाले (कैप्टन) के माध्यम से यह बताया गया है कि देश के निर्माण में केवल बड़े नेता ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों का भी योगदान होता है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हर साल चरित्र चित्रण, व्याख्या और मूल भाव से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
नेताजी की मूर्ति और चश्मे का बदलाव
कस्बे के चौराहे पर लगी सुभाष चंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति पर चश्मा नहीं था, जिसे कैप्टन चश्मेवाला रोज अपनी दुकान से लाकर बदल देता था।
कैप्टन चश्मेवाले का चरित्र
कैप्टन एक लंगड़ा और गरीब व्यक्ति था, लेकिन देश के प्रति उसके मन में अपार सम्मान था। वह नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति को देखकर आहत होता था।
हालदार साहब की भूमिका
हालदार साहब जब भी उस कस्बे से गुजरते, मूर्ति के बदलते चश्मे को देखकर हैरान होते और कैप्टन की देशभक्ति से प्रेरित होते थे।
पानवाले की उदासीनता और संवेदनशीलता
पानवाला कैप्टन का मजाक उड़ाता था, लेकिन जब कैप्टन की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी आँखें भी नम हो जाती हैं जो आम जनता के भीतर छिपे अपनत्व को दिखाती है।
देशभक्ति की नई परिभाषा
कहानी यह संदेश देती है कि देशभक्ति केवल सरहद पर जान देना नहीं है, बल्कि देश के प्रतीकों का सम्मान करना और अपने छोटे-छोटे कार्यों से देशहित में योगदान देना भी देशभक्ति है।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कैप्टन चश्मेवाले का चरित्र चित्रण, और 'बार-बार हालदार साहब का चश्मे वाले के प्रति क्या दृष्टिकोण था' जैसे दीर्घ उत्तरीय और वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
नेताजी की मूर्ति पर चश्मा कौन बदलता था और क्यों?
कैप्टन नामक चश्मेवाला नेताजी की मूर्ति पर चश्मा बदलता था क्योंकि उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति देखकर दुख होता था और वह उन्हें बिना चश्मे के नहीं देख सकता था।
हालदार साहब पहली बार कस्बे से गुजरते समय क्यों अचंभित हुए थे?
हालदार साहब इसलिए अचंभित हुए थे क्योंकि मूर्ति संगमरमर की थी लेकिन उस पर चश्मा असली (रियल) फ्रेम वाला था।
इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि देश के निर्माण में केवल बड़े लोगों का ही नहीं, बल्कि देश के आम नागरिकों, बच्चों और गरीबों का भी योगदान होता है जो देशभक्ति की भावना रखते हैं।
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