Class 10 Hindi - ANDHRA-PRADESH
Poetry: Sangatkaar
कक्षा 10 आंध्र प्रदेश बोर्ड (BSEAP) के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कविता 'संगतकार' मंगलेश डबराल द्वारा रचित एक संवेदनशील रचना है। यह कविता मुख्य गायक के साथ सुर में सुर मिलाने वाले संगतकार (सह-गायक) के त्याग, समर्पण और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मुख्य कलाकार के पीछे छिपी मेहनत और कला के प्रति निष्ठा को सराहा गया है। इस पाठ से छात्रों को जीवन में हर व्यक्ति के योगदान का सम्मान करने की सीख मिलती है, और परीक्षा में इस पर आधारित भावार्थ और लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
संगतकार का अर्थ और भूमिका
संगतकार वह व्यक्ति होता है जो मुख्य गायक के गाने के दौरान उसका साथ देता है और उसकी गूँज को संभालता है ताकि मुख्य गायक का स्वर अकेला न लगे।
मुख्य गायक की अनम्य आवाज
जब मुख्य गायक का गला बैठने लगता है या वह संगीत की ऊँचाइयों को छूते हुए भटकने लगता है, तब संगतकार अपनी आवाज को नियंत्रित रखकर उसे सहारा देता है।
संगतकार की मनुष्यता
इसे संगतकार की असफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता और उसका बड़प्पन माना जाता है कि वह मुख्य गायक को आगे रखने के लिए खुद को पीछे रखता है।
कविता का संदेश
यह कविता हमें सिखाती है कि समाज या कार्यक्षेत्र में पर्दे के पीछे रहकर सहयोग करने वाले लोगों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आगे दिखने वाले मुख्य व्यक्ति का।
Important Formulas
Board Exam Info
आंध्र प्रदेश बोर्ड (BSEAP) की कक्षा 10वीं हिंदी परीक्षा में इस पाठ से लगभग 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से गद्यांश या पद्यांश पर आधारित प्रश्न, संगतकार की विवशता या त्याग से जुड़े लघु उत्तरीय प्रश्न और भावार्थ स्पष्ट करने वाले प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता में संगतकार मुख्य गायक के साथ गाने वाले, ढोलक-तबल बजाने वाले या कोरस गाने वाले उस सह-कलाकार को कहा गया है जो मुख्य गायक की आवाज को बल देता है।
कविता में संगतकार मुख्य गायक के साथ गाने वाले, ढोलक-तबल बजाने वाले या कोरस गाने वाले उस सह-कलाकार को कहा गया है जो मुख्य गायक की आवाज को बल देता है।
संगतकार मुख्य गायक से अपनी आवाज को धीमा क्यों रखता है?
संगतकार अपनी आवाज को मुख्य गायक से धीमा रखता है ताकि मुख्य गायक का प्रभाव कम न हो और उसका स्वर ही मुख्य आकर्षण बना रहे।
संगतकार के मुख्य गायक के पीछे छूटने को मनुष्यता क्यों कहा गया है?
इसे संगतकार की मनुष्यता इसलिए कहा गया है क्योंकि वह अपनी प्रतिभा दिखाने की बजाय मुख्य गायक को जिताने और सफल बनाने में अपना सहयोग खुशी-खुशी देता है।
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